बंदा था मैं खुदा का, आदिम मुझे बनाया,
इंसानियत ने मेरी मुजरिम मुझे बनाया ।
माँगी सदा दुआ है, दुश्मन को भी खुशी दे,
हैवानियत दिखा के ज़ालिम मुझे बनाया ।
दिल में जिसे बसाया, की प्यार से ही सेवा,
झाँका जो उसके अंदर, खादिम मुझे बनाया ।
है शर्मनाक हरकत अपनों से की जो उसने,
कैसे बयां करूँ मैं, नादिम मुझे बनाया ।
रब ने मुझे सिखाया सबको गले लगाना,
सच को सदा जिताऊँ हातिम मुझे बनाया ।
कवि कुलवंत सिंह
Showing posts with label Gazal बंदा था मैं खुदा का. Show all posts
Showing posts with label Gazal बंदा था मैं खुदा का. Show all posts
Monday, April 21, 2008
Subscribe to:
Posts (Atom)
