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Monday, April 21, 2008

Gazal बंदा था मैं खुदा का

बंदा था मैं खुदा का, आदिम मुझे बनाया,
इंसानियत ने मेरी मुजरिम मुझे बनाया ।

माँगी सदा दुआ है, दुश्मन को भी खुशी दे,
हैवानियत दिखा के ज़ालिम मुझे बनाया ।

दिल में जिसे बसाया, की प्यार से ही सेवा,
झाँका जो उसके अंदर, खादिम मुझे बनाया ।

है शर्मनाक हरकत अपनों से की जो उसने,
कैसे बयां करूँ मैं, नादिम मुझे बनाया ।

रब ने मुझे सिखाया सबको गले लगाना,
सच को सदा जिताऊँ हातिम मुझे बनाया ।

कवि कुलवंत सिंह