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Friday, May 18, 2007

वंदना

माँ शारदा की वंदना

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वर दे... वर दे. .. वर दे ।
शतदल अंक शोभित वर दे ।
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मधुर मनोहर वीणा लहरी,
राग स्रोत की छ्टा है छ्हरी,
कण कण आभा अरुण सुनहरी,
तान हृदय में परिमित गहरी ।
उर में मेरे करुण भाव भर दे ।
वर दे ... वर दे .. वर दे ।
शतदल अंक शोभित वर दे ।
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तरू दल पर किसलय डोले,
पीहूं पीहूं पपीहा बोले,
मलय तरंगित ले हिंडोले,
आशीष शारदा मन पट खोले ।
काव्य किलोल कर मधुरिम कर दे ।
वर दे ... वर दे .. वर दे ।
शतदल अंक शोभित वर दे ।
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द्विज विस्मित कलरव विस्मृत,
सुरभि मंजरी दिगंत विस्तृत,
नाचे मयूर झूमे प्रकृति,
अंब वागेश्वरी संगीत निनादित ।
गीतों में मेरे रस छंद ताल भर दे ।
वर दे ... वर दे .. वर दे ।
शतदल अंक शोभित वर दे ।
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कवि कुलवंत सिंह