तुम पास तो आओ जरा,
दिल उदास है आज,
अंधेरों में घिरा है,
एक दीप तो जला जाओ।
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नयनो मे चंचलता नही,
अधरों पे मुस्कान नही,
जीवन में बहार नही,
कोई फूल तो खिला जाओ।
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तन में प्राण नही,
मन में भाव नही,
सांसों में महक नही,
देहगंध बिखरा जाओ।
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पांवों में गति नही,
हाथों में हलचल नही,
हृदय में धड़कन नही,
आकर सीने से लग जाओ।
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कवि कुलवंत सिंह
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Sunday, July 8, 2007
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