Showing posts with label लड़ाई. Show all posts
Showing posts with label लड़ाई. Show all posts

Wednesday, May 23, 2007

लडाई !

भाषा, मजहब, जात के नाम,
ईर्ष्या, द्वेष, वैमनस्य हो काम,
मक्का, मदीना, तीर्थ हो धाम।
लड़ना ही है क्या इंसान की फितरत?
.
बांग्ला, द्रविण, उर्दू, हिंदी,
मुस्लिम, हिंदू, इसाई, यहूदी,
सिया, सुन्नी, वहाबी, विर्दी,
लड़ना ही है क्या इंसान की फितरत?
.
ब्राह्मण - सूद्र - कायस्थ भेदभाव,
कायम समाज पर नासूर घाव,
संकीर्णता का करें परित्याग,
लड़ना ही है क्या इंसान की फितरत?
.
क्यूं न हम मिलकर लड़ें
उन दूरियों से जो करती अलग-
मानव को मानव से,
स्वार्थ, लोलुपता, भ्रष्टाचार से,
संत्रास, गरीबी, भुखमरी से,
अशिक्षा, अज्ञान, अंधकार से,
लड़ना ही है क्या इंसान की फितरत?
.
आओ हम सब मिलकर लड़ें-
सामाजिक कुरीतियों से,
प्राकृतिक आपदाओं से,
नैराश्य के अंधेरे से,
जीवन में भरें सबके प्रकाश।
.
कवि कुलवंत सिंह