शून्य में झांका ?
देखा !
क्या है उसके अंदर ?
शून्य सिर्फ़ शून्य नही है !
शून्य है -
उद्गम सृष्टि का ।
शून्य है -
अंतरिक्ष,
जो विस्तारित है -
अंतहीन अनंत;
शून्य है -
स्रोत अनंत का ।
शून्य जिससे उद्भव -
खगोल, ब्रह्मांड,
नक्षत्र, ग्रह, तारमंडल ।
शून्य से उद्भाषित
सब कुछ,
शून्य में ही
विलय सबका ।
क्या शून्य ही
एक सत्य -
शाश्वत सत्य ?
कवि कुलवंत सिंह..
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Thursday, October 25, 2007
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