Showing posts with label दोहा - सच. Show all posts
Showing posts with label दोहा - सच. Show all posts

Wednesday, April 16, 2008

दोहा - सच

सच की अर्थी ढ़ो रहा, ले कांधे पर भार ।
पहुंचाने शमशान भी, मिला न कोई यार ॥

कवि कुलवंत सिंह