गीत प्रणय का अधर सजा दो ।
स्निग्ध मधुर प्यार छलका दो ।
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शीतल अनिल अनल दहकाती,
सोम कौमुदी मन बहकाती,
रति यामिनी बीती जाती,
प्राण प्रणय आ सेज सजा दो ।
गीत प्रणय का अधर सजा दो ।
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गीत प्रणय का अधर सजा दो ।
स्निग्ध मधुर प्यार छलका दो ।
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ताल नलिन छटा बिखराती,
कुंतल लट बिखरी जाती,
गुंजन मधुप विषाद बढाती,
प्रिय वनिता आभास दिला दो ।
गीत प्रणय का अधर सजा दो ।
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गीत प्रणय का अधर सजा दो ।
स्निग्ध मधुर प्यार छलका दो ।
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नंदन कानन कुसुम मधुर गंध,
तारक संग शशि नभ मलंद,
अनुराग मृदुल शिथिल अंग,
रोम रोम मद पान करा दो ।
गीत प्रणय का अधर सजा दो ।
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गीत प्रणय का अधर सजा दो ।
स्निग्ध मधुर प्यार छलका दो ।
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कवि कुलवंत सिंह
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Friday, June 1, 2007
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