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Sunday, May 11, 2008

गज़ल - चले जाते हैं लोग

प्यार का इजहार करके क्यूँ चले जाते हैं लोग ।
कैसे जी पाते हैं वह हम तो लगा लेते हैं रोग ॥

चांद तारों को मैं जब भी देखता हूं साथ साथ,
यार मेरा लगता लौटेगा मिटाकर अब वियोग ।

कैसे भूलूँ उन पलों को साथ जो हमने बिताए,
रब की धरती पर मिला आशीष था कैसा सुयोग,

आ गले से लग ही जाओ, चंद सांसे ही बची हैं,
दो मुझे जीवन नया, अपना मिटा लो तुम भी सोग ।

याद तुमको गर नही हम, था जताया प्यार तुमने,
जिंदगी में तुम किसी के, अब न करना यह प्रयोग ।

कवि कुलवंत सिंह