Sunday, March 14, 2010

शहीद - ए - आजम भगत सिंह -2

शहीद - ए - आजम भगत सिंह -2

धरती माँ धिक्कार रही थी,
रो रो कर चीत्कार रही थी .
वीर पुत्र कब पैदा होंगे ?
जंजीरों को कब तोड़ेंगे ?

’जन्मा राजा भरत यहीं क्या ?
नाम उसी से मिला मुझे क्या ?
धरा यही दधीच क्या बोलो ?
प्राण त्यागना अस्थि दान को ?

बोलो बोलो राम कहाँ है ?
मेरा खोया मान कहाँ है ?
इक सीता का हरण किया था,
पूर्ण वंश को नष्ट किया था !

बोलो बोलो कृष्ण कहाँ है ?
उसका बोला वचन कहाँ है ?
धर्म हानि जब भारत होगी,
जीत सत्य की फिर फिर होगी !

अर्जुन अब कब पैदा होगा,
भीम गदा धर कब लौटेगा ?
पुण्य भूमि बेहाल हुई क्या ?
वीरों से कंगाल हुई क्या ?

नृपति अशोक चंद्रगुप्त कहाँ ?
मर्यादा भारत लुप्त कहाँ ?
कहाँ है शान वैशाली की ?
मिथिला, मगध, पाटलिपुत्र की ?

गौतम हो गये बुद्ध महान,
इस धरती पर लिया था ज्ञान .
दिया कितने देशों को दान,
संदेश दबा वह कहाँ महान ?

इसी धरा पर राज किया था,
विक्रमादित्य पर नाज किया था .
जन्मा पृथ्वीराज यहीं क्या ?
कर्मभूमि छ्त्रपति यही क्या ?

चेतक पर घूमा करता था,
हर पत्ता, बूटा डरता था .
घास की रोटी वन में खाई,
पराधीनता उसे न भाई .

जुल्मों की तलवार काटने,
भारत संस्कृति रक्षा करने .
चौक चाँदनी शीश कटाया,
सरे - आम संदेश सुनाया .

चिड़ियों से था बाज लड़ाया,
अजब गुरू गोबिंद की माया .
धरा धन्य थी उसको पाकर,
देश बचाया वंश लुटाकर .

वही धरा अब पूछ रही थी,
रो रो कर अब सूख रही थी .
लौटा दो मेरा स्वाभिमान,
धरती चाहती फिर बलिदान .

पराधीन की कड़ियाँ तोड़ो,
नदियों की धारा को मोड़ो .
कोना कोना भारत जोड़ो,
हाथ उठे जो ध्वंश, मरोड़ो .

सिंह नाद सा गुंजन करने,
तूफानों में कश्ती खेने .
वह अमर वीर कब आयेगा ?
मुझको आजाद करायेगा !

हर बच्चा भारत बोल उठे,
सीने में ज्वाला खौल उठे .
हर दिल में आश जगाये जो,
भूमि निछावर हो जाये जो !

हर - हर बम बम जय घोष करो,
अग्नि क्रांति की हर हृदय भरो .
नर - नारी सब तरुण देख लें,
करना आहुति प्राण सीख लें !

बहुत हुआ अब मर मर जीना,
अनुसाल दासता की सहना . (अनुसाल = पीड़ा)
संभव वीर न भू पे लाना ?
ताण्डव शिव को याद दिलाना !’

कवि कुलवंत सिंह

4 comments:

Amitraghat said...

"भगत सिंह के "बम दर्शन" पर भी कविता लिखिए....."
amitraghat.blogspot.com

वन्दना अवस्थी दुबे said...

बहुत सुन्दर.वैसे भी मार्च के महीने में भगत सिंह की याद सिर चढ के बोलती है.

अनामिका की सदाये...... said...

pehli baar apka blog padha...bahut acchhi rachna. aage bhi intzar rahega.

डॉ. रूपचन्द्र शास्त्री मयंक said...

अमर सेनानी की याद में लिखी कविता साहित्य की धरोहर के रूप में याद रखी जायेगी!
बहुत-बहुत बधाई!