Wednesday, April 2, 2008

गज़ल - भरम पाला था..

पेशे खिदमत है एक गज़ल -

भरम पाला था मैने प्यार दो तो प्यार मिलता है ।
यहाँ मतलब के सब मारे न सच्चा यार मिलता है ।

लुटा दो जां भले अपनी न छोड़ें खून पी लेंगे,
जिसे देखो छुपा के हाथ में तलवार मिलता है ।

बहा लो देखकर आँसू न जग में पोंछता कोई,
दिखा दो अश्क दुनिया को तो बस धिक्कार मिलता है ।

नही मै चाहता दुनिया मुझे अब थोड़ा जीने दो,
मिटाकर खुद को देखो तो भी बस अंगार मिलता है ।

मै पागल हूँ जो दुनिया में सभी को अपना कहता हूँ,
खफा यह मुझसे हैं उनका मुझे दीदार मिलता है ।

मुखौटा देख लो पहना यहाँ हर आदमी नकली
डराना दूसरे को हो सदा तैयार मिलता है ।

कवि कुलवंत सिंह
http://kavikulwant.blogspot.com

9 comments:

nadeem said...

waahhh
bahut khoob janab.

अभिनव said...

Badhiya .. talwaar waala sher bahut badhiya laga..

सुनीता शानू said...

एसा लगता है हर शब्द किसी तीर की तरह निकल रहा है...क्या खूब लिखा है...हर शेर बहुत सुन्दर है

रश्मि प्रभा said...

भरम में ही जीता चला जाता है आदमी
यहाँ इतनी आसानी से कोई हमराह नहीं मिलता.......
भरम का इजहार अच्छा किया

Dr. RAMJI GIRI said...

"नही मै चाहता दुनिया मुझे अब थोड़ा जीने दो,
मिटाकर खुद को देखो तो भी बस अंगार मिलता है ।"

बहुत ही सुन्दर और सटीक बयानी है दुनिया के दोमुहे व्यवहार पर .
पर कुलवंत जी, 'मीरा' भी यही पैदा हुई थी, और 'टेरेसा' भी इसी दुनिया की मिसाल है .
कुछ भी अगर अपने सुखन के लिए करें और बदले में कुछ उम्मीद ना रखे ,तो ज़िन्दगी ज्यादा पुरसुकुन होती है.

Kavi Kulwant said...

आप सभी प्रिय मित्रों का हार्दिक धन्यवाद..

nitin said...

बहुत खूब सर बहुत प्यारी ग़ज़ल है,
-" जिसे देखो हाथ में छिपा के तलवार मिलता है"
गहरी बात कही है, आपकी ये ग़ज़ल पसंद आई, कितनी
कड़वी सच्चाई है इसमें, जैसे किसी के सामने दर्पण रख दिया हो,
इसके लिये आप बधाई के पात्र है........ शुभकामना..............
शुभेच्छु- नितिन शर्मा

Chetan Framewala said...

मै पागल हूँ जो दुनिया में सभी को अपना कहता हूँ,
खफा यह मुझसे हैं उनका मुझे दीदार मिलता है ।

मुखौटा देख लो पहना यहाँ हर आदमी नकली
डराना दूसरे को हो सदा तैयार मिलता है ।
मैं पहेली बार आपके ब्लोग पर आया हुं . बेहद प्रश्न्नता हुई.
चेतन फ्रेमवाला

Anonymous said...

sahi kahaa aapne, matlab ke bina pyar nahi hota aur pyar ke bina matlab nahi hota... hume bhi issi bharam ki bimaari ho chali hai! Ab log humse milna nahi chaahte aur hume logon se milne se darr lagta hai. keep smiling and keep writing. :)