Monday, April 21, 2008

Gazal बंदा था मैं खुदा का

बंदा था मैं खुदा का, आदिम मुझे बनाया,
इंसानियत ने मेरी मुजरिम मुझे बनाया ।

माँगी सदा दुआ है, दुश्मन को भी खुशी दे,
हैवानियत दिखा के ज़ालिम मुझे बनाया ।

दिल में जिसे बसाया, की प्यार से ही सेवा,
झाँका जो उसके अंदर, खादिम मुझे बनाया ।

है शर्मनाक हरकत अपनों से की जो उसने,
कैसे बयां करूँ मैं, नादिम मुझे बनाया ।

रब ने मुझे सिखाया सबको गले लगाना,
सच को सदा जिताऊँ हातिम मुझे बनाया ।

कवि कुलवंत सिंह

5 comments:

अल्पना वर्मा said...

माँगी सदा दुआ है, दुश्मन को भी खुशी दे,
हैवानियत दिखा के ज़ालिम मुझे बनाया ।

bahut khuub kaha hai is sher mein.

ghazal achchee lagi.

mehek said...

रब ने मुझे सिखाया सबको गले लगाना,
सच को सदा जिताऊँ हातिम मुझे बनाया ।

bahut sahi baat,bahut sundar gazal hai.

Kavi Kulwant said...

अल्पना जी महक जी आप दोनो का बहुत बहुत शुक्रिया..

Udan Tashtari said...

बंदा था मैं खुदा का, आदिम मुझे बनाया,
इंसानियत ने मेरी मुजरिम मुझे बनाया ।


--बहुत बढ़िया.

Kavi Kulwant said...

समीर जी.. बहुत धन्यवाद..